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समिति ने कहा- तय वेशभूषा नहीं थी, अरुणिमा बोलीं- कपड़े मुद्दा क्यों
उज्जैन | एवरेस्ट फतह करने वाली देश की पहली दिव्यांग अरुणिमा सिन्हा को महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश नहीं देने के मामले में जिला प्रशासन ने मंगलवार को जांच रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया कि निर्धारित वेशभूषा में नहीं होने से अरुणिमा महाकाल गर्भगृह में दर्शन नहीं कर पाई। इधर अरुणिमा ने कहा- हर बार महिला के कपड़े को मुद्दा क्यों बनाया जाता है? रविवार तड़के 4.30 बजे जब महाकाल मंदिर पहुंची तो एक लड़के को जींस पहनकर मंदिर के गर्भगृह से बाहर आते देखा था। मेरा एक पैर नहीं होने की वजह से साड़ी पहनने में कठिनाई आती है और चलने में सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। इस दौरान टीशर्ट और लोअर पहने थीं। मंदिर के कर्मचारियों से आग्रह करने के बाद भी गर्भगृह में नहीं जाने दिया। महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद होने के दौरान यदि किसी को अनुमति दी जाती है तो पुरुषों को सोला (धोती) और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
उधर प्रदेश के गृहमंत्री और उज्जैन के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह ने अरुणिमा सिन्हा के साथ महाकाल में हुए दुर्व्यवहार पर अफसोस जताया। उज्जैन संभागायुक्त एमबी ओझा ने कहा- मंदिर के गर्भगृह में साड़ी पहनकर जाने की परंपरा अनादिकाल से है। कलेक्टर से प्राप्त जांच प्रतिवेदन में यहीं बात साफ हुई है। इधर कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा- इस घटना से शिवराज सरकार की बेटियों व दिव्यांगों के नाम पर चल रही तमाम योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने आ गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया- यह घटना एक बार फिर इस सरकार की असंवेदनशीलता उजागर करती है।